अब अाप हि है | Pushparaj Sinh Jadeja

Pushparaj Sinh Jadeja

ना आसमान की हसरत है न ज़मीन की तलाश है

ना बाग-ए-बेहशत की ख्वाहिश है ना अज़ल-ऐ-अमन का ख्वाब

चाहत है तो बस आपकी नूर-ए-जिनदगि

अब आप हि मेरी रूह अोर अाप हि मेरी सांस है

ना चांद कि शितलता मे ना आफताब कि तापिश मे

ना खजम कि नसिम मे ना बहार के फुलो मे

अब खुशी है तो आपकी पनाहों मे

आप हि मेरी खामोशी आप हि मेरी आवाज है

 

ना महलों कि हसरत है ना ताज के अरमान है

ना रुतबे कि चाह है ना तख्त कि आरजू

दिल तो अपका गुलाम है मलिका-ए-हुस्न

दिल तो अापका गुलाम है मलिका-ए-हुस्न

अब अाप हि है आवाम अोर आप का हि इख्तियार है

 

मयस्सर है ये नाचिज आप पुकार कर तो देखिये

कभी हम से नजरे मिला कर तो देखिये

जान भि लूटा दे आप पे अाप एक दफा आजमा कर तो देखिये

दो जहां एक कर दे ये आशिक आपकी एक मुसकुराहट को

दो जहां एक कर दे ये आशिक आपकी एक मुसकुराहट को

आप एक बार प्यार जता कर तो देखिये

If you like our content and would like to help us sustain our standard, make a donation and help us in a big way!

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s